मेरे स्नेही जन

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Wednesday, October 3, 2012

संदेश… नन्हें पथिक को




एक में भी अनेक हो तुम
तुम से है, पहचान हमारी
तुम्हें देखती दुनिया सारी ।
ज्ञान के नन्हें दीप तुम
सूर्य के नन्हें प्रतीक  तुम
वक्त के साथ बढ़ना है ,
 उच्च शिखर पर चढ़ना है ।
अंजली भर सपने बटोर रहे
हर सपना सच करना है
दूर बहुत चलना है, पथिक
हौसलाऔर बुलन्द करना है ।
चाहत की तस्वीर हो तुम
भारत की तकदीर हो तुम
बुलंदी के उस पार जाना है
सारा जाहाँ जगाना है ।
न होना निराश कभी तुम
न खोना विश्वास कभी तुम
सिर्फ हाथ भर की दूरी है
छूने को आसमां है ।
नित नया निर्माण करो तुम
कण-कण में प्राण भरो तुम
नव चेतन जोत जगाना है
नव भारत तुम्हें बनाना है ।
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महेश्वरी कनेरी