मेरे स्नेही जन

Sunday, June 2, 2013

काले –काले बादल आ


काले काले बादल आ

छम-छम  पानी बरसा

प्यासी धरती तुम्हें पुकारे

मोर पपीहा तुम्हें निहारे

रिमझिम का गीत सुना

काले काले बादल आ

मेरा भैया रोता है

गर्मी में नहीं सोता है

ठंडी हवा का झोंका ला

काले काले बादल आ

कागज़ की हम नाव बनाएं

पानी में उसे चलाएं

वर्षा से आँगन भर जा

काले काले बादल आ

छम-छम पानी बरसा

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महेश्वरी कनेरी 

Thursday, May 2, 2013

मेरा भैया

 मेरा भैया
     

मेरा भैया सबसे प्यारा

गोलू-मोलू न्यारा-न्यारा

बाँहों के झूले में उसे झुलाती

गीत चंदा का गाकर उसे सुलाती

सब की आँखों का,है वो तारा

मेरा भैया सबसे प्यारा ....

होठ घुमा घुमा कर वो बतियाता

अंगु-अंगु कह कर मुझे हँसाता

अनबुझ शब्दों का,है वो पिटारा

मेरा भैया सबसे प्यारा ....

चमकीली गोल-गोल मुस्काती आँखें

नन्हें होठ जैसे हों संतरे की फाँकें

हम सबका है, वो दुलारा

मेरा भैया सबसे प्यारा....

ईश्वर से मैंने भैया माँगा था

ऐसा ही भैया ,मैंनें चाहा था

निर्मल पावन प्यार हमारा

मेरा भैया सबसे प्यारा

गोलू-मोलू न्यारा-न्यारा

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महेश्वरी कनेरी 

Saturday, April 13, 2013

बादल



भीगा वर्षा में जब राजू
आकर माँ से बोला
माँ ! एक बात बतलाओ
क्या है राज मुझे समझाओ
उमड़ घुमड़ कर बादल आते
झम-झम पानी वे बरसाते
कहाँ से आते बादल, माँ !
कहाँ जा छिप जाते ?
वर्षा से आँगन भर जाता
इतना पानी कहाँ से आता
क्या है राज मुझे समझाओ
क्या है बात मुझे बतलाओ
माँ ने बेटे को बतलाया
राज बादल का उसे समझाया
सूरज जब गरमी फैलाता
नदी ,सागर का पानी
तब भाप बन उड़ जाते
और नभ पर जा छा जाते
असंख्य जल बूँद लिए वे
इधर उधर मड़राते
यही तो बादल कहलाते
उमड़ घुमड़ कर जब वो चलते
जा पर्वत से टकराते
तब बनकर वर्षा वे
वापस धरती पर आजाते
इसी तरह धरती का पानी
वापस धरती पर आजाता
रिम-झिम गीत सुनाकर
जग में खुशहाली भर जाता
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महेश्वरी कनेरी

Tuesday, January 29, 2013

हम बच्चें


हम बच्चें
हम छोटे –छॊटे बच्चें हैं
अक्ल के नहीं हम कच्चे हैं
कदम हमारे छोटे है पर
हिम्मत के हम पक्के हैं
बात पते की करते हम है
सच्ची बातें हम करते
आसमां को छूने की भी
 हिम्मत हम भी रखते हैं
झूठ से नफरत है हमको
लालच कभी न करते
जितनी भी मिल जाती हमको
खुशी खुशी ले लेते
आँधी आए या तूफान
हम नहीं डरा करते हैं
काले काले बादल में भी
इन्द्रधनुष रचा करते हैं
हम छोटे –छोटे बच्चें हैं
अक्ल के हम नहीं कच्चे हैं
कदम हमारे छोटे है पर
हिम्मत के हम पकके हैं
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महेश्वरी कनेरी

Monday, January 14, 2013

हम बच्चें.(.बाल गीत.)...

प्रस्तुत प्रोग्राम मैंने अपने स्कूल के  वार्षिक उत्सव में करवाया  था,जिसे 
सभी ने बहुत पसंद किया था.। इसमें बच्चों के लिए  शिक्षा प्रद बातें तो  है ही साथ हीबहुत मनोरंजक भी है..

महेश्वरी कनेरी..

Saturday, December 15, 2012

भेड़िया और बकरी का बच्चा ( गीतो भरी कहानी)



  आओ बच्चों आज मैं तुम्ह्रें बकरी के बच्चे की एक कहानी सुनाती हूँ जिसने मुसिबत में हिम्मत से काम लिया बिल्कुल नही घबराया.. ….तो चलो सुनते है ये कहानी.. आप को पता है ? इसे मेरे स्कूल के छोटे-छोटे बच्चों ने गाया था । आज वे सब बहुत बड़े होगये होंगे..उनकी इस मासूम आवाज को मैंने सहेज कर रखा है..

 तो सुना कैसी लगी …?बच्चों हमें हमेशा दो बातो का ध्यान रखना चाहिए ..
१--- मुसीबत आने पर घबराना नहीं ,विवेक और सूझ बूझसे काम लेना चाहिए ।
२- - अपने से बडो़ का कहा मानना चाहिए..
     महेश्वरी कनेरी

  

Sunday, November 11, 2012

आई दिवाली





आई दिवाली

आई दिवाली आई दिवाली

घर घर खुशिया लाई दिवाली


मम्मी ने पकवान बनाएं

पापा खील खिलौने लाएं


दीपों का त्यौहार है प्यारा

सब तरफ हुआ उजियारा


लक्ष्मी गणेश की पूजा करते

लड्डू मिठाई भोग लगाते


चुन्नु मुन्नु तुम भी आओ

प्रेम की इक फुलझड़ी जलाओ


करते जाओ बस इक वादा

मनाओ दिवाली् बिन पटाखा

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दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं


महेश्वरी कनेरी